हर हर महादेव
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, मांधाता द्वीप, नर्मदा, मध्य प्रदेश
04 / 12 · चतुर्थ ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर

नदी ने स्वयंपवित्र अक्षर लिखा।

📍 ओंकारेश्वर · मांधाता द्वीप, नर्मदा, मध्य प्रदेश

नर्मदा एक पहाड़ी के चारों ओर बँटकर पुनः मिल जाती है, और जो आकृति बनती है वह स्वयं ॐ मानी जाती है। उसी द्वीप पर ओंकारेश्वर हैं — और दूसरे तट पर ममलेश्वर, जिन्हें बहुत-से लोग उसी ज्योतिर्लिंग का आधा भाग मानते हैं।

आकृतिद्वीप ॐ चिह्न बनाता है
दो धामओंकारेश्वर और ममलेश्वर — दोनों के दर्शन
परिक्रमाद्वीप के चारों ओर ~7 कि.मी.
चित्र: Deveshc92 · CC BY 4.0 · Wikimedia Commons
देख रहे हैं…समयबुकिंगजाने से पहलेकैसे पहुँचेंचित्रप्रश्न

सभी ध्वनियों से पूर्व की ध्वनि।एक नदी द्वारा लिखी गई।पत्थर में, एक द्वीप पर।

04

कथा

शिव यहीं क्यों विराजे, और कहीं और क्यों नहीं — जैसा शिवपुराण और स्थानीय परंपरा कहती है।

विंध्य की तपस्या

मेरु से ईर्ष्या करते हुए विंध्य पर्वत ने नर्मदा के तट पर मिट्टी का लिंग बनाया और बहुत लंबे समय तक शिव की आराधना की। शिव प्रकट हुए और माँगा हुआ वरदान दे दिया।

वह लिंग जो दो हुआ

वहाँ उपस्थित देवताओं ने शिव से वहीं रुकने की प्रार्थना की। वे मान गए — और लिंग दो भागों में बँट गया। एक भाग द्वीप पर ओंकारेश्वर हुआ; दूसरा दक्षिणी तट पर ममलेश्वर, अथवा अमरेश्वर। परंपरा आज भी अनिश्चित है कि *वह* ज्योतिर्लिंग कौन-सा है, इसलिए श्रद्धालु दोनों के दर्शन करते हैं।

द्वीप की परिक्रमा

मांधाता केवल देखा नहीं जाता, चला जाता है। परिक्रमा द्वीप के चारों ओर लगभग सात किलोमीटर चलती है — घाटों, खंडहर मंदिरों और नर्मदा के ऊपर चट्टानों से होकर। भोर में नंगे पाँव यह परिक्रमा करना ही बहुतों के लिए यहाँ आने का पूरा कारण है।

आकृति
द्वीप ॐ चिह्न बनाता है
दो धाम
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर — दोनों के दर्शन
परिक्रमा
द्वीप के चारों ओर ~7 कि.मी.
नदी
नर्मदा, जिसकी सम्पूर्ण परिक्रमा संन्यासी करते हैं
दर्शन

समय एवं दैनिक आरतियाँ

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ऊपर दिखाई गई स्थिति मंदिर के घोषित समय के अनुसार सजीव है।

भारत में अभी--:--
प्रातःकालसुबह 5:00दोपहर 12:20
अपराह्नदोपहर 1:15शाम 4:00
सायंकालशाम 4:15रात 8:00

मंदिर प्रातः 5:00 बजे खुलता है और रात 9:30 बजे बंद होता है। आरती और शृंगार के समय दर्शन बंद रहते हैं। सामान्य दिन में भी 30–40 मिनट की पंक्ति की अपेक्षा रखें।

आरती एवं अनुष्ठान का समय

  • सुबह 5:00 – सुबह 5:30मंगला आरतीदिन का आरंभ
  • दोपहर 12:20 – दोपहर 1:15माध्यन्ह आरती
  • शाम 4:00 – शाम 4:15संध्या / शृंगार
  • रात 8:30 – रात 9:30शयन आरतीसमापन विधि
पर्व के दिनों में, श्रावण मास में और कभी-कभी बिना सूचना के समय बदलता है। 13 अगस्त 2026 को सत्यापित — यात्रा से पहले मंदिर के आधिकारिक पोर्टल पर पुष्टि अवश्य कर लें।
बुकिंग

दर्शन, आरती एवं पंजीकरण

क्या बुक होता है, क्या निःशुल्क है, और आधिकारिक माध्यम वास्तव में कौन-सा है।

सामान्य दर्शन

निःशुल्क, कोई बुकिंग नहीं। द्वीप के मंदिर में पंक्ति में लगें।

शीघ्र (VIP) दर्शन

सशुल्क शीघ्र-दर्शन टिकट काउंटर और ऑनलाइन दोनों उपलब्ध है, जो सप्ताहांत और श्रावण भर उपयोगी रहता है।

म.प्र. मंदिर पोर्टल

अभिषेक एवं जलाभिषेक

गर्भगृह में प्रायोजित अभिषेक मंदिर कार्यालय से तय किया जा सकता है; प्रातःकालीन स्लॉट सीमित हैं।

जाने से पहले

वस्त्र-नियम, नियम एवं व्यय

वस्त्र-नियम

पुरुष

शालीन वस्त्र; गर्भगृह में अभिषेक हेतु पारंपरिक वस्त्र वांछनीय।

महिलाएँ

साड़ी, सलवार-कमीज़, अथवा कंधे और घुटने ढकने वाला कोई भी वस्त्र।

भीतर वर्जित

चमड़े की वस्तुएँगर्भगृह में कैमराबड़े बैग

व्यय

  • सामान्य दर्शननिःशुल्क
  • शीघ्र दर्शनकाउंटर / ऑनलाइन सशुल्क
  • नौका पार₹20–₹50 प्रति व्यक्ति
  • रोपवेटिकट

व्यावहारिक सुझाव

  • कम से कम एक बार पुल के बजाय नौका से पार करें — जल से द्वीप का दृश्य ही देखने योग्य है।
  • दक्षिणी तट पर ममलेश्वर भी अवश्य जाएँ। इसे छोड़ देना यहाँ की सबसे आम भूल है।
  • परिक्रमा प्रातः 7 बजे से पहले आरंभ करें; मध्याह्न तक पाँव के नीचे चट्टान सचमुच तप जाती है।
यात्रा

ओंकारेश्वर कैसे पहुँचें

मांधाता द्वीप, नर्मदा, मध्य प्रदेश22.245°N, 76.1508°E

वायुमार्ग
देवी अहिल्याबाई होल्कर, इंदौर
~80 कि.मी.

निकटतम हवाई अड्डा, सनावद होते हुए टैक्सी से लगभग दो घंटे।

🚉
रेलमार्ग
ओंकारेश्वर रोड (मोरटक्का)
~12 कि.मी.

खंडवा–इंदौर लाइन पर छोटा ठहराव। खंडवा जंक्शन (~70 कि.मी.) बड़ा और बेहतर जुड़ा रेलहेड है।

🚌
सड़क मार्ग
बस या कार से
सीधे

इंदौर ~80 कि.मी., उज्जैन ~140 कि.मी., खंडवा ~70 कि.मी., महेश्वर ~65 कि.मी.। इंदौर और खंडवा से बसें नियमित चलती हैं।

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कब आएँ

यात्रा का सर्वोत्तम समय

मा
जू
जु
सि
दि

अक्तूबर से मार्च आदर्श है — परिक्रमा के लिए पर्याप्त ठंडक और नर्मदा भरी हुई। खुली चट्टान पर ग्रीष्म कठोर है। वर्षा सुंदर है पर नदी ऊँची बहती है और नौका सेवा रुक सकती है।

  • महाशिवरात्रिफ़र० / मार्चरातभर दर्शन और द्वीप पर बड़ा मेला।
  • श्रावणजुलाई / अग०काँवरिये नर्मदा जल लेकर आते हैं; सोमवार खचाखच भरे।
  • नर्मदा जयंतीजन० / फ़र०नदी का अपना पर्व — जल पर दीप प्रवाहित किए जाते हैं।
  • कार्तिक पूर्णिमानवंबरघाटों पर सामूहिक स्नान और मेला।
धाम के आसपास

और क्या देखें

ममलेश्वर मंदिर
दक्षिणी तट

विभाजित लिंग का दूसरा भाग। प्राचीन शिल्प, शांत प्रांगण, कहीं कम भीड़।

द्वीप परिक्रमा
~7 कि.मी.

गौड़ी सोमनाथ, सिद्धनाथ और चट्टानी घाटों से होकर पूरी परिक्रमा।

महेश्वर
~65 कि.मी.

अहिल्याबाई होल्कर का नदी-तट किला और घाट; माहेश्वरी साड़ियों का उद्गम।

उज्जैन
~140 कि.मी.

महाकालेश्वर, तृतीय ज्योतिर्लिंग — सामान्य सहयात्रा।

प्रश्न

श्रद्धालु क्या पूछते हैं

असली ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर है या ममलेश्वर?
परंपरा वास्तव में विभाजित है — कहा जाता है कि लिंग दो भागों में बँट गया था। श्रद्धालु दोनों के दर्शन करके इसका समाधान कर लेते हैं, जिसमें केवल एक अतिरिक्त घंटा लगता है।
द्वीप परिक्रमा में कितना समय लगता है?
सात किलोमीटर की पूरी परिक्रमा सहज गति से तीन-चार घंटे, छोटे मंदिरों पर रुकें तो अधिक। भोर में आरंभ करें।
क्या मंदिर तक पहुँचने के लिए नौका आवश्यक है?
नहीं — दो पुल द्वीप को जोड़ते हैं। किंतु नौका बहुत कम मूल्य की है और पहुँचने का बेहतर तरीका है।
क्या ओंकारेश्वर और उज्जैन साथ किए जा सकते हैं?
हाँ। दोनों लगभग 140 कि.मी. दूर हैं और प्रायः एक ही यात्रा में किए जाते हैं, सामान्यतः पहले उज्जैन।
कितनी भीड़ होती है?
सामान्य कार्यदिवस में पंक्ति 30–40 मिनट की रहती है। श्रावण सोमवार और महाशिवरात्रि पर कई घंटे — तब शीघ्र दर्शन लें।
क्या रोपवे है?
हाँ, द्वीप पर रोपवे चलता है और उन दर्शनार्थियों के लिए उपयोगी है जो सीढ़ियाँ और चढ़ाई नहीं कर सकते।

क्या आपने यहाँ दर्शन किए हैं?

ओंकारेश्वर के लिए एक दीप जलाइए — वह पूरी साइट पर जलता रहेगा, और बारहों की ओर आपकी प्रगति इसी डिवाइस पर याद रहेगी।

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उज्जैन, शिप्रा तट पर · मध्य प्रदेश
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केदारनाथ
केदारनाथ, रुद्रप्रयाग · उत्तराखंड
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पृष्ठ अंतिम बार 13 अगस्त 2026 को अद्यतन · बारहों ज्योतिर्लिंग