12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का समय क्या है?
हर मंदिर अपना समय स्वयं घोषित करता है। बारहों में दर्शन रात 2:30 से सुबह 7:00 के बीच शुरू होते हैं और रात 8:00 से रात 11:00 के बीच समाप्त होते हैं, तथा इनमें से 8 दोपहर में विराम लेते हैं। इस पृष्ठ के ऊपर की तालिका में हर मंदिर के दर्शन-समय सजीव खुला/बंद स्थिति के साथ दिए गए हैं।
कौन-सा ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए सबसे पहले खुलता है?
काशी विश्वनाथ, जहाँ दर्शन रात 2:30 बजे शुरू होकर रात 11:00 बजे तक चलते हैं — भारत के किसी भी मंदिर के सबसे लंबे दर्शन-दिवसों में से एक।
कौन-से ज्योतिर्लिंग दोपहर में बंद रहते हैं?
मल्लिकार्जुन (दोपहर 1:00 – दोपहर 3:00), ओंकारेश्वर (दोपहर 12:20 – दोपहर 1:15, शाम 4:00 – शाम 4:15), केदारनाथ (दोपहर 3:00 – शाम 5:00), भीमाशंकर (दोपहर 12:00 – दोपहर 12:30), वैद्यनाथ (दोपहर 3:30 – शाम 6:00), नागेश्वर (दोपहर 12:30 – शाम 5:00), रामनाथस्वामी (दोपहर 1:00 – दोपहर 3:00) और घृष्णेश्वर (दोपहर 3:00 – शाम 5:30)। सोमनाथ, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ और त्र्यंबकेश्वर में दोपहर का कोई निश्चित विराम नहीं है, यद्यपि किसी अनुष्ठान के समय दर्शन रुक सकते हैं।
क्या बारहों ज्योतिर्लिंगों में दर्शन निःशुल्क है?
हाँ। सामान्य दर्शन बारह में से किसी भी धाम पर निःशुल्क है; अधिक से अधिक पंक्ति में लगना पड़ता है। शुल्क केवल शॉर्टकट का है — कई मंदिरों में शीघ्र दर्शन पास — और टिकट वाली आरतियों व प्रायोजित पूजाओं का। ऊपर हर मंदिर के खंड में उसका शुल्क दिया गया है।
महाकालेश्वर में भस्म आरती कितने बजे होती है?
प्रतिदिन सुबह 4:00 – सुबह 6:00। प्रवेश निःशुल्क है, पर आधिकारिक पोर्टल पर बुकिंग अनिवार्य है और स्थान सीमित हैं। रात 2:30 बजे तक द्वार पर पहुँचें — अनुष्ठान शुरू होने से बहुत पहले प्रवेश बंद हो जाता है।
केदारनाथ दर्शन के लिए कब खुला रहता है?
केवल यात्रा-काल में: कपाट 22 अप्रैल 2026 को खुलते हैं और ≈ 11 नवंबर 2026 (भैया दूज) को बंद होते हैं। इस अवधि में दर्शन सुबह 7:00 – दोपहर 3:00 और शाम 5:00 – रात 8:30 होते हैं। इसके बाहर धाम बंद रहता है और भगवान की पूजा ऊखीमठ में होती है।
क्या श्रावण और महाशिवरात्रि पर दर्शन का समय बदलता है?
हाँ, काफ़ी। महाशिवरात्रि की रात कई मंदिर पूरी रात खुले रहते हैं, दोनों अवसरों पर घृष्णेश्वर सुबह 3 बजे से ही खुलकर रात 11 बजे तक खुला रहता है, और श्रावणी मेले में वैद्यनाथ का समय बढ़ जाता है। घोषित समय को सामान्य दिनों का समय मानें और पर्व पर जाने से पहले मंदिर की अपनी सूचना देखें।
दर्शन के लिए दिन का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
लगभग हर जगह सुबह-सुबह, और सोमवार को छोड़कर किसी कार्यदिवस पर। काशी विश्वनाथ में सुबह 6 से 8, सोमनाथ में सुबह 6 से 7 और घृष्णेश्वर में सुबह 6 बजे पंक्ति सबसे छोटी रहती है; रामेश्वरम् में सुबह 4:30 बजे तक पहुँचें। तिथियाँ लचीली हों तो सोमवार, श्रावण और पर्वों से बचें।
ये समय कितने सटीक हैं?
ये हर मंदिर के आधिकारिक पोर्टल से संकलित हैं और अंतिम बार 13 अगस्त 2026 को सत्यापित किए गए। मंदिर कभी-कभी बिना पूर्व सूचना के समय बदल देते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक पोर्टल पर — जिसका लिंक हर मंदिर के खंड में है — पुष्टि अवश्य करें।