हर हर महादेव
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, श्रीशैलम, नल्लामला पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश
02 / 12 · द्वितीय ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन

एक ज्योतिर्लिंग,और एक शक्तिपीठ।

📍 मल्लिकार्जुन · श्रीशैलम, नल्लामला पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश

कृष्णा नदी के ऊपर नल्लामला वन में बसा श्रीशैलम एक दुर्लभ द्विगुण पवित्रता रखता है — बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, और अठारह महाशक्तिपीठों में से एक, वह भी एक ही पर्वत पर, एक ही प्रांगण में।

दुर्लभ क्योंज्योतिर्लिंग + महाशक्तिपीठ
किसके ऊपरकृष्णा नदी की घाटी
भीतरनल्लामला बाघ अभयारण्य
चित्र: Chintohere · Public domain · Wikimedia Commons
देख रहे हैं…समयबुकिंगजाने से पहलेकैसे पहुँचेंचित्रप्रश्न

एक पुत्र रूठकर घर छोड़ गया।माता-पिता उसके पीछे पर्वत तक आए।तब से दोनों में से कोई नहीं गया।

02

कथा

शिव यहीं क्यों विराजे, और कहीं और क्यों नहीं — जैसा शिवपुराण और स्थानीय परंपरा कहती है।

फल की प्रतियोगिता

नारद ने कहा — जो पहले संसार की परिक्रमा कर आएगा, यह दिव्य फल उसी का। कार्तिकेय अपने मयूर पर पृथ्वी की परिक्रमा को निकल पड़े। गणेश ने बस अपने माता-पिता की परिक्रमा की और कहा — आप ही मेरा संसार हैं। फल गणेश को मिला।

वह पुत्र जो चला गया

कार्तिकेय लौटे तो पाया कि एक पहेली ने उन्हें हरा दिया है। क्रोध में वे कैलाश छोड़कर दक्षिण के क्रौंच पर्वत चले गए, यह प्रण लेकर कि कभी नहीं लौटेंगे। शिव और पार्वती प्रतीक्षा करते रहे। फिर वे स्वयं उनके पीछे गए।

मल्लिका और अर्जुन

माता-पिता पुत्र के निकट रहने के लिए उसी पर्वत पर बस गए। पार्वती ने भ्रमराम्बा का रूप लिया और शिव ने अर्जुन का — और क्योंकि देवी ने मल्लिका (चमेली) से उनकी पूजा की, धाम मल्लिकार्जुन कहलाया। वे ज्योतिर्लिंग हैं; वे शक्तिपीठ हैं। और कहीं ये दोनों सूचियाँ इतनी पूर्णता से नहीं मिलतीं।

दुर्लभ क्यों
ज्योतिर्लिंग + महाशक्तिपीठ
किसके ऊपर
कृष्णा नदी की घाटी
भीतर
नल्लामला बाघ अभयारण्य
स्पर्श दर्शन
अनुमत — आप लिंग का स्पर्श कर सकते हैं
दर्शन

समय एवं दैनिक आरतियाँ

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ऊपर दिखाई गई स्थिति मंदिर के घोषित समय के अनुसार सजीव है।

भारत में अभी--:--
प्रातःकालीन दर्शनसुबह 6:00दोपहर 1:00
सायंकालीन दर्शनदोपहर 3:00रात 10:00

मंदिर अनुष्ठानों के लिए प्रातः 4:00 बजे खुलता है और रात 10:00 बजे बंद होता है। जनवरी 2026 से देवस्थानम शनिवार, रविवार, सोमवार और सार्वजनिक अवकाश पर भीड़ नियंत्रण हेतु चरणबद्ध स्लॉट प्रणाली चलाता है — इन दिनों स्लॉट पहले से बुक करें।

आरती एवं अनुष्ठान का समय

  • सुबह 4:30 – सुबह 5:00सुप्रभात सेवादेव-जागरण
  • सुबह 5:00 – सुबह 6:00मंगल वाद्य एवं अभिषेकम्
  • सुबह 6:30 – सुबह 8:00सामूहिक अभिषेकम्सामूहिक अभिषेक, पूर्व बुकिंग से₹1,500
  • सुबह 6:00 – सुबह 7:00गर्भालय अभिषेकम्गर्भगृह के भीतर, लिंग के समीप। स्लॉट अत्यंत सीमित₹5,000
  • दोपहर 12:00 – दोपहर 12:30महामंगल हारतीमध्याह्न
  • शाम 6:00 – रात 7:00प्रदोष काल पूजा
  • रात 9:30 – रात 10:00एकांत सेवाभगवान को शयन कराया जाता है
पर्व के दिनों में, श्रावण मास में और कभी-कभी बिना सूचना के समय बदलता है। 13 अगस्त 2026 को सत्यापित — यात्रा से पहले मंदिर के आधिकारिक पोर्टल पर पुष्टि अवश्य कर लें।
बुकिंग

दर्शन, आरती एवं पंजीकरण

क्या बुक होता है, क्या निःशुल्क है, और आधिकारिक माध्यम वास्तव में कौन-सा है।

दर्शन एवं सेवा बुकिंग

स्पर्श दर्शन, अति शीघ्र दर्शन, अभिषेकम् और होम — सभी श्रीशैल देवस्थानम पोर्टल पर बुक होते हैं। गर्भगृह की सेवाओं के स्लॉट शीघ्र भर जाते हैं।

srisailadevasthanam.org

व्यस्त दिनों में चरणबद्ध स्लॉट

शनिवार, रविवार, सोमवार और सार्वजनिक अवकाश पर प्रवेश निर्धारित स्लॉट से होता है। इन दिनों पूर्व बुकिंग व्यावहारिक रूप से अनिवार्य है।

स्लॉट बुक करें

ठहरने की व्यवस्था

देवस्थानम पर्वत पर कॉटेज और छत्रों का बड़ा नेटवर्क चलाता है, जिनकी बुकिंग उसी पोर्टल से होती है।

देवस्थानम आवास
जाने से पहले

वस्त्र-नियम, नियम एवं व्यय

वस्त्र-नियम

पुरुष

गर्भगृह की सेवाओं के लिए पारंपरिक वस्त्र अपेक्षित हैं — धोती अथवा पंचा और उत्तरीय। सामान्य दर्शन हेतु कमीज़-पतलून स्वीकार्य है।

महिलाएँ

साड़ी अथवा सलवार-कमीज़। गर्भगृह की सशुल्क सेवाओं के लिए पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य हैं।

भीतर वर्जित

गर्भगृह में मोबाइल फ़ोनकैमराचमड़े की वस्तुएँद्वार से आगे जूते-चप्पल

व्यय

  • सामान्य दर्शननिःशुल्क
  • शीघ्र दर्शनसशुल्क — पोर्टल देखें
  • स्पर्श दर्शनसशुल्क, सीमित स्लॉट
  • सामूहिक अभिषेकम्₹1,500
  • गर्भालय अभिषेकम्₹5,000

व्यावहारिक सुझाव

  • अपने स्लॉट से 30–45 मिनट पहले पहुँचें; सुरक्षा जाँच और गोपुरम तक की पैदल दूरी में समय लगता है।
  • उसी प्रांगण में भ्रमराम्बा देवी के दर्शन अवश्य करें — इसे छोड़ देना श्रीशैलम का पूरा अर्थ ही छोड़ देना है।
  • यहाँ आने वाला मार्ग बाघ अभयारण्य से होकर जाता है और रात में यातायात के लिए बंद हो जाता है। संध्या से पहले पहुँचने की योजना बनाएँ।
यात्रा

मल्लिकार्जुन कैसे पहुँचें

श्रीशैलम, नल्लामला पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश16.074°N, 78.8683°E

वायुमार्ग
राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय, हैदराबाद
~200 कि.मी.

व्यावहारिक हवाई अड्डा। नल्लामला घाट से होते हुए टैक्सी लगभग चार घंटे लेती है। विजयवाड़ा (~270 कि.मी.) विकल्प है।

🚉
रेलमार्ग
मार्कापुर रोड (MRK)
~85 कि.मी.

निकटतम रेलहेड, हैदराबाद, मुंबई और बेंगलुरु से जुड़ा। APSRTC बसें अंतिम चरण लगभग तीन घंटे में तय करती हैं। नंद्याल (~158 कि.मी.) और कुंबम (~102 कि.मी.) भी उपयोगी हैं।

🚌
सड़क मार्ग
बस या कार से
सीधे

APSRTC और TSRTC हैदराबाद (~200 कि.मी., 5–6 घंटे), कर्नूल, गुंटूर और विजयवाड़ा से सीधी बसें चलाते हैं। अंतिम वन-चढ़ाई सुरम्य किंतु धीमी है।

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कब आएँ

यात्रा का सर्वोत्तम समय

मा
जू
जु
सि
दि

अक्तूबर से मार्च पर्वत पर सुखद रहता है। नल्लामला में ग्रीष्म कठोर है; वर्षा में घाट मार्ग फिसलन भरा पर वन अद्भुत हो जाता है। महाशिवरात्रि और उगादि पर अपार भीड़ होती है।

  • महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सवम्फ़र० / मार्चग्यारह दिवसीय उत्सव — वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन।
  • उगादिमार्च / अप्रैलतेलुगु नववर्ष; अत्यधिक आवागमन।
  • दशहरा / नवरात्रिसित० / अक्तू०भ्रमराम्बा मंदिर केंद्र में रहता है।
  • कार्तिक मासमनव० / दिस०प्रदोष और दीपदान का पूरा मास।
धाम के आसपास

और क्या देखें

भ्रमराम्बा देवी मंदिर
उसी परिसर में

शक्तिपीठ। परंपरा कहती है कि इसके बिना श्रीशैलम की यात्रा अधूरी है।

श्रीशैलम बाँध
~8 कि.मी.

कृष्णा घाटी पर विशाल जलाशय; दृश्य-स्थल यहाँ का प्रसिद्ध पड़ाव है।

पालधारा पंचधारा
~4 कि.मी.

वन में पाँच सदानीरा जलधाराएँ, जहाँ आदि शंकराचार्य ने ध्यान किया कहा जाता है।

अक्कमहादेवी गुफाएँ
पातालगंगा से नौका द्वारा

कृष्णा नदी में नौका से पहुँचने वाली लंबी चूना-पत्थर गुफा, बारहवीं सदी की संत-कवयित्री के नाम पर।

प्रश्न

श्रद्धालु क्या पूछते हैं

क्या श्रीशैलम में लिंग का स्पर्श किया जा सकता है?
हाँ — श्रीशैलम उन थोड़े-से ज्योतिर्लिंगों में है जहाँ स्पर्श दर्शन उपलब्ध है। यह सशुल्क, सीमित-स्लॉट सेवा है और देवस्थानम पोर्टल पर बुक करनी चाहिए।
बारहों में श्रीशैलम विशेष क्यों है?
यह एक साथ ज्योतिर्लिंग (मल्लिकार्जुन) और महाशक्तिपीठ (भ्रमराम्बा) दोनों है — शिव और शक्ति एक ही परिसर में। किसी अन्य ज्योतिर्लिंग में यह दोनों नहीं।
क्या पहले से बुकिंग आवश्यक है?
सप्ताह के सामान्य दिनों में नहीं। शनिवार, रविवार, सोमवार और सार्वजनिक अवकाश पर 2026 से चरणबद्ध स्लॉट प्रणाली लागू है और पूर्व बुकिंग की दृढ़ सलाह है।
हैदराबाद से श्रीशैलम कैसे पहुँचें?
सड़क मार्ग से लगभग 200 कि.मी., नल्लामला वन से होकर TSRTC बस या टैक्सी से पाँच-छह घंटे। बाघ अभयारण्य वाला मार्ग रात में यातायात हेतु बंद रहता है।
क्या वर्षा ऋतु में मंदिर खुला रहता है?
हाँ, वर्ष भर। केवल घाट मार्ग तेज़ वर्षा में कठिन हो जाता है।
गर्भगृह की सेवाओं के लिए वस्त्र-नियम क्या है?
गर्भगृह की सशुल्क सेवाओं हेतु पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य हैं — पुरुषों के लिए धोती और उत्तरीय, महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-कमीज़।

क्या आपने यहाँ दर्शन किए हैं?

मल्लिकार्जुन के लिए एक दीप जलाइए — वह पूरी साइट पर जलता रहेगा, और बारहों की ओर आपकी प्रगति इसी डिवाइस पर याद रहेगी।

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सोमनाथ
प्रभास पाटन, वेरावल · गुजरात
01
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महाकालेश्वर
उज्जैन, शिप्रा तट पर · मध्य प्रदेश
03
पृष्ठ अंतिम बार 13 अगस्त 2026 को अद्यतन · बारहों ज्योतिर्लिंग